श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 194
 
 
श्लोक  2.18.194 
এ রঙ্গ রহিব হেন বিষাদ ভাবিযা
অতএব গৌরচন্দ্র করিলেন ইহা
ए रङ्ग रहिब हेन विषाद भाविया
अतएव गौरचन्द्र करिलेन इहा
 
 
अनुवाद
गौरचन्द्र ने उस लीला के पूर्ण होने पर भक्तों के महान शोक के माध्यम से उनकी आसक्ति को बढ़ाने के लिए ऐसा किया।
 
Gaurachandra did this to increase the attachment of the devotees through their great grief at the completion of that pastime.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)