श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 190
 
 
श्लोक  2.18.190 
পোহাইল নিশি, হৈল নৃত্য-অবসান
বাজিল সবার বুকে যেন মহাবাণ
पोहाइल निशि, हैल नृत्य-अवसान
बाजिल सबार बुके येन महाबाण
 
 
अनुवाद
रात होते-होते नृत्य बंद हो गया। यह बात सबके दिलों में एक तीखे तीर की तरह चुभ गई।
 
By nightfall, the dancing had stopped. This news pierced everyone's hearts like a sharp arrow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)