श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 189
 
 
श्लोक  2.18.189 
আনন্দে না জানে লোক নিশি ভেল শেষ
দারুণ অরুণ আসিঽ ভেল পরবেশ
आनन्दे ना जाने लोक निशि भेल शेष
दारुण अरुण आसिऽ भेल परवेश
 
 
अनुवाद
आनंद में उन्हें ध्यान ही नहीं रहा कि रात समाप्त हो चुकी है और चमकीला सूरज उग चुका है।
 
In their joy they did not notice that the night had ended and the bright sun had risen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)