श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 188
 
 
श्लोक  2.18.188 
আনন্দে সকল লোক বাহ্য নাহি জানে
হেনৈ সমযে নিশি হৈল অবসানে
आनन्दे सकल लोक बाह्य नाहि जाने
हेनै समये निशि हैल अवसाने
 
 
अनुवाद
जैसे ही वे सभी आनंद में डूब गए, रात समाप्त हो गई।
 
The night ended as they all basked in the bliss.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)