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श्लोक 2.18.187  |
গৃহ-মাঝে কান্দে সব পতি-ব্রতা-গণ
আনন্দ হৈল চন্দ্রশেখর-ভবন |
गृह-माझे कान्दे सब पति-व्रता-गण
आनन्द हैल चन्द्रशेखर-भवन |
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| अनुवाद |
| पवित्र स्त्रियाँ कमरे के अन्दर रो पड़ीं और चन्द्रशेखर का घर परमानंद से भर गया। |
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| The holy women wept inside the room and Chandrashekhar's house was filled with ecstasy. |
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