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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य
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श्लोक 185
श्लोक
2.18.185
“সবেই লৈল মাতা তোমার শরণ
শুভ দৃষ্টি কর তোর পদে বহু মন”
“सबेइ लैल माता तोमार शरण
शुभ दृष्टि कर तोर पदे बहु मन”
अनुवाद
"हे माँ, हम सब आपके चरणकमलों की शरण में हैं। कृपया हम पर अपनी कृपा दृष्टि डालें ताकि हमारा मन आपके चरणकमलों में स्थिर रहे।"
"O Mother, we all take refuge in your lotus feet. Please shower your kind glance upon us so that our minds remain fixed on your feet."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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