राज-विद्या राज-गुह्यम् पवित्रम् इदम उत्तमम्
प्रत्यक्षागमम् धर्म्यम् सु-सुखम् कर्तुम अव्ययम
यह ज्ञान शिक्षा का राजा है, सभी गुप्त ज्ञान का सबसे गुप्त ज्ञान है। यह सबसे शुद्ध ज्ञान है, और क्योंकि यह आत्म-साक्षात्कार द्वारा स्वयं की प्रत्यक्ष अनुभूति देता है, यह धर्म की पूर्णता है। यह चिरस्थायी है, और इसे आनंदपूर्वक निष्पादित किया जाता है।' पाठ में शब्द माया बाहरी ऊर्जा को संदर्भित करता है। श्री जैसे उसके पहलू उससे अलग हैं। अन्य वही हैं। यद्यपि इन सभी ऊर्जाओं को प्रभु की आंतरिक या आध्यात्मिक ऊर्जा के पहलुओं में गिना जाता है, यह निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए कि चूंकि परम सत्य सत्-चित-आनंद है, ऊर्जा एक है फिर भी तीन में विभाजित है।
