श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 169
 
 
श्लोक  2.18.169 
ব্রহ্মা, বিষ্ণু, মহেশ্বরে তোমার মহিমা
বলিতে না পারে, অন্যে কেবা দিবে সীমা
ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वरे तोमार महिमा
बलिते ना पारे, अन्ये केबा दिबे सीमा
 
 
अनुवाद
ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर भी आपकी महिमा का वर्णन करने में असमर्थ हैं, तो फिर अन्य लोग आपकी महिमा की सीमा तक कैसे पहुँच सकते हैं?
 
Even Brahma, Vishnu and Maheshwara are unable to describe Your glory, so how can others reach the extent of Your glory?
तात्पर्य
"आप अनगिनत ब्रह्मांडों की देवी हैं। आपकी ऊर्जा के प्रभाव से, युगों के धार्मिक सिद्धांतों की रक्षा होती है। लौकिक अभिव्यक्ति के सृजन, रखरखाव और विनाश के लिए तीन प्रमुख देवता आपकी महिमा का गुणगान करने में असमर्थ हैं, इसलिए कैसे वे जो उनके अधीनस्थ हैं, आपकी महिमा की सीमा का पता लगाएँगे?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)