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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य
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श्लोक 155
श्लोक
2.18.155
কম্প, স্বেদ, পুলক, অশ্রুর অন্ত নাই
মূর্তিমতী ভক্তি হৈলা চৈতন্য-গোসাঞি
कम्प, स्वेद, पुलक, अश्रुर अन्त नाइ
मूर्तिमती भक्ति हैला चैतन्य-गोसाञि
अनुवाद
भगवान चैतन्य भक्ति सेवा के साक्षात स्वरूप बन गए, उनके कांपने, पसीना आने, रोंगटे खड़े होने तथा आंसू बहने का कोई अंत नहीं था।
Lord Chaitanya became the very embodiment of devotional service, and there was no end to His trembling, sweating, goosebumps, and tears.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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