vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य
»
श्लोक 150
श्लोक
2.18.150
যে শিখায কৃষ্ণচন্দ্র, সেই সত্য হয
অভাগ্য পাপিষ্ঠ-মতি তাহা নাহি লয
ये शिखाय कृष्णचन्द्र, सेइ सत्य हय
अभाग्य पापिष्ठ-मति ताहा नाहि लय
अनुवाद
भगवान कृष्णचन्द्र जो कुछ भी सिखाते हैं, वह सत्य है। केवल अभागे पापी मनुष्य ही उसे स्वीकार नहीं करते।
Whatever Lord Krishnachandra teaches is true. Only unfortunate, sinful people do not accept it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×