श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 144
 
 
श्लोक  2.18.144 
ক্ষণে বলে,—“চল বডাই, যাই বৃন্দাবনে”
গোকুল-সুন্দরী-ভাব বুঝিযে তখনে
क्षणे बले,—“चल बडाइ, याइ वृन्दावने”
गोकुल-सुन्दरी-भाव बुझिये तखने
 
 
अनुवाद
एक अन्य अवसर पर जब उन्होंने कहा, "आओ, प्रिय बुढ़िया, हम वृन्दावन चलें," तो उन्होंने समझ लिया कि वे गोकुल की एक सुन्दर कन्या के प्रेम में हैं।
 
On another occasion, when he said, "Come, dear old lady, let us go to Vrindavan," she understood that he was in love with a beautiful girl from Gokula.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)