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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य
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श्लोक 143
श्लोक
2.18.143
ঢলিযাঢলিযা প্রভু নাচযে যখনে
সাক্ষাত্ রেবতী যেন কাদম্বরী-পানে
ढलियाढलिया प्रभु नाचये यखने
साक्षात् रेवती येन कादम्बरी-पाने
अनुवाद
जब भगवान नाचते हुए लड़खड़ाते थे, तो वे ऐसे प्रतीत होते थे जैसे रेवती कोई मादक पेय पीकर लड़खड़ा रही हो।
When the Lord staggered while dancing, He appeared as if Revati was staggering after drinking some intoxicating drink.
तात्पर्य
शब्द रेवती श्री बलदेव की अर्धांगिनी को कहते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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