श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 138
 
 
श्लोक  2.18.138 
জগত-জননী ভাবে নাচে বিশ্বম্ভর
সময-উচিত গীত গায অনুচর
जगत-जननी भावे नाचे विश्वम्भर
समय-उचित गीत गाय अनुचर
 
 
अनुवाद
जब विश्वम्भर ने ब्रह्माण्ड की माता के भाव में नृत्य किया, तो उनके अनुयायियों ने उपयुक्त गीत गाए।
 
When Vishvambhara danced in the spirit of the Mother of the Universe, his followers sang appropriate songs.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)