श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 135
 
 
श्लोक  2.18.135 
কৃপা-জল-নিধি প্রভু হৈলা সবারে
সবার জননী-ভাব হৈল অন্তরে
कृपा-जल-निधि प्रभु हैला सबारे
सबार जननी-भाव हैल अन्तरे
 
 
अनुवाद
प्रभु सबके लिए दया के सागर बन गए। सभी ने अपने हृदय में उन्हें अपनी माता के रूप में स्वीकार किया।
 
The Lord became an ocean of mercy for everyone, and everyone accepted her in their hearts as their mother.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)