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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य
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श्लोक 133
श्लोक
2.18.133
মহামহেশ্বর হর যে রূপ দেখিযা
মহামোহ পাইলেন পার্বতী লৈযা
महामहेश्वर हर ये रूप देखिया
महामोह पाइलेन पार्वती लैया
अनुवाद
इस रूप को देखकर देवताओं में श्रेष्ठ भगवान शिव और पार्वती भी मोहित हो गए।
Seeing this form, even Lord Shiva and Parvati, the best among the gods, were fascinated.
तात्पर्य
श्रीमद भागवतम् (8.12.12-25) पर चर्चा करनी चाहिए |
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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