श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  2.18.131 
অন্যের কি দায, আই না পারে চিনিতে
আই বলে,—“লক্ষ্মী কিবা আইলা নাচিতে?”
अन्येर कि दाय, आइ ना पारे चिनिते
आइ बले,—“लक्ष्मी किबा आइला नाचिते?”
 
 
अनुवाद
अन्य लोगों की तो बात ही क्या, माता शची भी उन्हें पहचान न सकीं। उन्होंने कहा, "क्या लक्ष्मी नृत्य करने आई हैं?"
 
Forget about other people, even Mother Shachi could not recognize her. She said, "Has Lakshmi come to dance?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)