vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य
»
श्लोक 131
श्लोक
2.18.131
অন্যের কি দায, আই না পারে চিনিতে
আই বলে,—“লক্ষ্মী কিবা আইলা নাচিতে?”
अन्येर कि दाय, आइ ना पारे चिनिते
आइ बले,—“लक्ष्मी किबा आइला नाचिते?”
अनुवाद
अन्य लोगों की तो बात ही क्या, माता शची भी उन्हें पहचान न सकीं। उन्होंने कहा, "क्या लक्ष्मी नृत्य करने आई हैं?"
Forget about other people, even Mother Shachi could not recognize her. She said, "Has Lakshmi come to dance?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×