श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  2.18.123 
কেহ নারে চিনিতে ঠাকুর বিশ্বম্ভর
হেন অলক্ষিত বেশ অতি মনোহর
केह नारे चिनिते ठाकुर विश्वम्भर
हेन अलक्षित वेश अति मनोहर
 
 
अनुवाद
भगवान विश्वम्भर ने ऐसी मनमोहक पोशाक पहन रखी थी कि कोई भी उन्हें पहचान नहीं सका।
 
Lord Vishvambhar was wearing such a beautiful attire that no one could recognize him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)