|
| |
| |
श्लोक 2.18.119  |
চৌদিকে শুনিযে কৃষ্ণ-প্রেমের ক্রন্দন
গোপিকার বেশে নাচে মাধব-নন্দন |
चौदिके शुनिये कृष्ण-प्रेमेर क्रन्दन
गोपिकार वेशे नाचे माधव-नन्दन |
| |
| |
| अनुवाद |
| जब माधव पुत्र गोपी वेश में नृत्य कर रहे थे, तब कृष्ण के प्रेम में आनंदित होकर रोने की ध्वनि सर्वत्र सुनाई दे रही थी। |
| |
| When Madhava's son was dancing in the guise of a Gopi, the sound of weeping in joy at the love of Krishna was heard everywhere. |
| ✨ ai-generated |
| |
|