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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य
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श्लोक 118
श्लोक
2.18.118
ঽহরি হরিঽ বলিঽ কান্দে বৈষ্ণব-মণ্ডল
সর্ব-গণে হৈল আনন্দ-কোলাহল
ऽहरि हरिऽ बलिऽ कान्दे वैष्णव-मण्डल
सर्व-गणे हैल आनन्द-कोलाहल
अनुवाद
सभी वैष्णव चिल्लाने लगे, “हरि! हरि!” उनके बीच आनंद की लहर दौड़ गई।
All the Vaishnavas started shouting, "Hari! Hari!" A wave of joy ran through them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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