श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  2.18.117 
যে গায, যে দেখে, সব ভাসিলেন প্রেমে
চৈতন্য-প্রসাদে কেহ বাহ্য নাহি জানে
ये गाय, ये देखे, सब भासिलेन प्रेमे
चैतन्य-प्रसादे केह बाह्य नाहि जाने
 
 
अनुवाद
जो गा रहे थे और जो देख रहे थे, वे सभी आनंदमय प्रेम की लहरों में तैर रहे थे। भगवान चैतन्य की कृपा से, उनकी सारी बाह्य चेतना नष्ट हो गई।
 
All those who sang and those who watched were floating in waves of blissful love. By the grace of Lord Chaitanya, all their external consciousness vanished.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)