श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  2.18.111 
অদ্বৈতের বাক্য শুনিঽ পরম সন্তোষে
নৃত্য করে গদাধর প্রেম পরকাশে
अद्वैतेर वाक्य शुनिऽ परम सन्तोषे
नृत्य करे गदाधर प्रेम परकाशे
 
 
अनुवाद
अद्वैत के वचन सुनकर गदाधर अत्यंत संतुष्ट हुए और फिर प्रेमोन्मत्त होकर नाचने लगे।
 
Hearing the words of Advaita, Gadadhara became very satisfied and then started dancing in ecstasy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)