श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  2.18.109 
অদ্বৈত বলযে,—“এত বিচারে কি কাজ
ঽমাতৃ-সমা পরনারীঽ কেন দেহঽ লাজ?
अद्वैत बलये,—“एत विचारे कि काज
ऽमातृ-समा परनारीऽ केन देहऽ लाज?
 
 
अनुवाद
अद्वैत बोला, "ऐसे सवालों की कोई ज़रूरत नहीं है। दूसरों की पत्नियाँ माँ के बराबर होती हैं। उन्हें शर्मिंदा क्यों करना?"
 
Advaita said, "There is no need for such questions. Other people's wives are like mothers. Why embarrass them?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)