श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  2.18.106 
শ্রীবাস বলযে,—“জানিবারে না জুযায?”
ঽহযঽ বলিঽ ব্রহ্মানন্দ মস্তক ঢুলায
श्रीवास बलये,—“जानिबारे ना जुयाय?”
ऽहयऽ बलिऽ ब्रह्मानन्द मस्तक ढुलाय
 
 
अनुवाद
श्रीवास ने कहा, “क्या यह जानना हमारे लिए उचित नहीं है?” ब्रह्मानन्द ने अपना सिर हिलाकर उत्तर दिया, “यह सही है।”
 
Srivasa said, “Isn’t it right for us to know this?” Brahmananda nodded his head and replied, “That is correct.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)