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श्लोक 2.17.88  |
শুনিযা অদ্বৈত-বাক্য শ্রী-গৌরসুন্দর
অদ্বৈতেরে কহে সর্ব-বৈষ্ণব-গোচর |
शुनिया अद्वैत-वाक्य श्री-गौरसुन्दर
अद्वैतेरे कहे सर्व-वैष्णव-गोचर |
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| अनुवाद |
| अद्वैत के वचन सुनकर श्री गौरसुन्दर ने समस्त वैष्णवों के समक्ष उनसे बात की। |
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| Hearing the words of Advaita, Sri Gaurasundara spoke to him in the presence of all the Vaishnavas. |
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