श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  2.17.66 
অদ্বৈতের প্রতি দণ্ড করিযাঠাকুর
শেষে অনুগ্রহ মনে বাডিল প্রচুর
अद्वैतेर प्रति दण्ड करियाठाकुर
शेषे अनुग्रह मने बाडिल प्रचुर
 
 
अनुवाद
भगवान ने अद्वैत को इस प्रकार दण्डित किया, किन्तु अन्ततः उन्हें उस पर बड़ी दया आई।
 
The Lord punished Advaita in this way, but ultimately He felt great pity for him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)