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श्लोक 2.17.66  |
অদ্বৈতের প্রতি দণ্ড করিযাঠাকুর
শেষে অনুগ্রহ মনে বাডিল প্রচুর |
अद्वैतेर प्रति दण्ड करियाठाकुर
शेषे अनुग्रह मने बाडिल प्रचुर |
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| अनुवाद |
| भगवान ने अद्वैत को इस प्रकार दण्डित किया, किन्तु अन्ततः उन्हें उस पर बड़ी दया आई। |
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| The Lord punished Advaita in this way, but ultimately He felt great pity for him. |
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