vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन
»
श्लोक 58
श्लोक
2.17.58
পাসরিলা দুঃখ প্রভু নন্দন-সেবায
সুকৃতি নন্দন বসিঽ তাম্বূল যোগায
पासरिला दुःख प्रभु नन्दन-सेवाय
सुकृति नन्दन वसिऽ ताम्बूल योगाय
अनुवाद
भगवान ने पुण्यवान नन्दन आचार्य की सेवा करके अपना सारा दुःख भूल दिया, जो वहाँ बैठकर पान-सुपारी चढ़ा रहे थे।
The Lord forgot all His sorrows by serving the virtuous Nandana Acharya, who was sitting there offering betel leaves and nuts.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×