श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  2.17.42 
অভিমানে সেবকেরা বলিল বচন
প্রভু তাহে লৈবে কি ভৃত্যের জীবন?”
अभिमाने सेवकेरा बलिल वचन
प्रभु ताहे लैबे कि भृत्येर जीवन?”
 
 
अनुवाद
“अगर नौकर घमंड में कुछ बोल दें, तो क्या उनका मालिक उनकी जान ले लेता है?”
 
“If servants say something out of pride, does their master take their lives?”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)