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श्लोक 2.17.39  |
“তুমি কেনে ধরিলা আমার কেশ-ভারে?”
নিত্যানন্দ বলে,—“কেনে যাহ মরিবারে” |
“तुमि केने धरिला आमार केश-भारे?”
नित्यानन्द बले,—“केने याह मरिबारे” |
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| अनुवाद |
| “आपने मेरे बाल क्यों पकड़े?” नित्यानंद ने उत्तर दिया, “आपने स्वयं को मारने का प्रयास क्यों किया?” |
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| “Why did you grab my hair?” Nityananda replied, “Why did you try to kill yourself?” |
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