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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन
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श्लोक 38
श्लोक
2.17.38
দুই-জনে মহা কম্প—ঽআজি কিবা ফলেঽ!
নিত্যানন্দ দিগ্ চাহিঽ গৌরচন্দ্র বলে
दुइ-जने महा कम्प—ऽआजि किबा फलेऽ!
नित्यानन्द दिग् चाहिऽ गौरचन्द्र बले
अनुवाद
दोनों यह सोचकर काँप उठे, “आज क्या होगा?” नित्यानंद की ओर देखते हुए गौरचन्द्र बोले।
Both of them shuddered at the thought, “What will happen today?” Gaurachandra asked, looking at Nityananda.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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