श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.17.26 
চৈতন্যের প্রেমে মত্ত আচার্য গোসাঞি
কি বলযে, কি করযে, কিছু স্মৃতি নাই
चैतन्येर प्रेमे मत्त आचार्य गोसाञि
कि बलये, कि करये, किछु स्मृति नाइ
 
 
अनुवाद
आचार्य गोसांई भगवान चैतन्य के प्रेम में उन्मत्त हो गए। उन्हें याद नहीं रहा कि उन्होंने क्या कहा था और क्या किया था।
 
Acharya Gosain became mad with love for Lord Chaitanya. He could not remember what he had said or done.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)