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श्लोक 2.17.111  |
সর্ব-প্রভু—গৌরচন্দ্র, ইথে দ্বিধা যাঽর
তার ভক্তি শুদ্ধ নহে, সেই দুরাচার |
सर्व-प्रभु—गौरचन्द्र, इथे द्विधा याऽर
तार भक्ति शुद्ध नहे, सेइ दुराचार |
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| अनुवाद |
| जो व्यक्ति इस बात में किंचितमात्र भी संदेह करता है कि गौरचन्द्र ही सबके स्वामी हैं, वह पापी है और उसकी भक्ति शुद्ध नहीं है। |
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| Anyone who has even the slightest doubt that Gaurachandra is the master of all is a sinner and his devotion is not pure. |
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