श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  2.17.109 
হেন কৃষ্ণ-ভক্ত-নামে কোন শিষ্য-গণ
অল্প-হেন জ্ঞানে দ্বন্দ্ব করে অনুক্ষণ
हेन कृष्ण-भक्त-नामे कोन शिष्य-गण
अल्प-हेन ज्ञाने द्वन्द्व करे अनुक्षण
 
 
अनुवाद
कुछ नवदीक्षित लोग कृष्ण के ऐसे भक्तों को तुच्छ समझते हैं और उनसे निरन्तर झगड़ते रहते हैं।
 
Some neophytes look down upon such devotees of Krishna and constantly quarrel with them.
तात्पर्य
वे मूर्ख तथाकथित भक्त जो अपनी संकीर्ण मानसिकता के कारण आपस में ही कलह करते हैं, वैष्णवों के चरणों में अपराधी होते हैं, और फलस्वरूप उन्हें असीम दुख प्राप्त होता है। अगर कोई वैष्णवों के कृत्यों और लक्षणों की समझ के बिना किसी एक वैष्णव का पक्ष लेता है और दूसरे की आलोचना करता है, तो वह वैष्णवों को नहीं बल्कि केवल उनके बाहरी स्वरूप को ही देखता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)