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श्लोक 2.17.106  |
আগে হয মুক্তি, তবে সর্ব-বন্ধ-নাশ
তবে সে হৈতে পারে শ্রী-কৃষ্ণের দাস |
आगे हय मुक्ति, तबे सर्व-बन्ध-नाश
तबे से हैते पारे श्री-कृष्णेर दास |
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| अनुवाद |
| पहले मनुष्य को मोक्ष प्राप्त होता है, फिर उसके भौतिक बंधन नष्ट हो जाते हैं, तब वह भगवान कृष्ण का सेवक बन सकता है। |
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| First a man attains salvation, then his material bonds are destroyed, then he can become a servant of Lord Krishna. |
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