তর্জে গর্জে আচার্য দাডিতে দিযা হাত
ভ্রূকুটি করিযা নাচে শান্তিপুর-নাথ
तर्जे गर्जे आचार्य दाडिते दिया हात
भ्रूकुटि करिया नाचे शान्तिपुर-नाथ
अनुवाद
शांतिपुर के स्वामी अद्वैत आचार्य ने अपनी दाढ़ी को छुआ और जोर से दहाड़ते हुए अपनी भौंहें सिकोड़कर नृत्य किया।
Swami Advaita Acharya of Shantipur touched his beard and danced with his eyebrows furrowed, roaring loudly.
तात्पर्य
शास्त्रीय आदेश का पालन करते हुए श्री अद्वैत प्रभु ने अपनी मूंछें, दाढ़ी और बाल काट लिए। ठोड़ी पर किसी भी लंबाई के बालों को सामान्य भाषा में दाढ़ी कहते हैं। यही कारण है कि अज्ञानता के कारण कुछ लोग उन्हें मूर्ख बाउल की तरह कपड़े, दाढ़ी और बालों के लक्षण बताते हैं। लेकिन वास्तव में वह स्वच्छ मुंडित थे। उन्हें नाडा कहना उनके मुंडा सिर का संकेत है [बांग्ला में न्याड़ा शब्द, जो नाडा शब्द का अपभ्रंश है, एक व्यक्ति को एक साफ मुंडा सिर को दर्शाता है]।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥