श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  2.16.98 
অদ্বৈত আচার্য মহা-আনন্দে বিহ্বল
মহা-মত্ত হৈঽ নাচে পাসরিঽ সকল
अद्वैत आचार्य महा-आनन्दे विह्वल
महा-मत्त हैऽ नाचे पासरिऽ सकल
 
 
अनुवाद
अद्वैत आचार्य आनंद से अभिभूत हो गए। वे सब कुछ भूलकर मदमस्त होकर नाचने लगे।
 
Advaita Acharya was overwhelmed with joy. Forgetting everything, he began to dance in a trance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)