श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  2.16.94 
আমরা ও ভাগ্যবন্ত হেন ভক্ত-সঙ্গে
এ ভক্তের পদ-ধূলি লৈ সর্ব অঙ্গে”
आमरा ओ भाग्यवन्त हेन भक्त-सङ्गे
ए भक्तेर पद-धूलि लै सर्व अङ्गे”
 
 
अनुवाद
"हम भी ऐसे भक्त का संग पाकर सौभाग्यशाली हैं। हम इस भक्त की धूलि को अपने पूरे शरीर पर धारण करते हैं।"
 
"We too are fortunate to be in the company of such a devotee. We wear the dust of this devotee all over our bodies."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)