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श्लोक 2.16.93  |
কদাচিত্ এ প্রসাদ শঙ্করে সে পায
যাহা করে অদ্বৈতেরে শ্রী-গৌরাঙ্গ-রায |
कदाचित् ए प्रसाद शङ्करे से पाय
याहा करे अद्वैतेरे श्री-गौराङ्ग-राय |
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| अनुवाद |
| “शिव को शायद ही ऐसी कृपा प्राप्त होती है जैसी अद्वैत को भगवान गौरांग से प्राप्त हुई। |
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| “Seldom does Shiva receive such grace as Advaita received from Lord Gauranga. |
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