श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  2.16.91 
অদ্বৈতের প্রতি দেখিঽ কৃপার বৈভব
অপূর্ব চিন্তযে মনে সকল-বৈষ্ণব
अद्वैतेर प्रति देखिऽ कृपार वैभव
अपूर्व चिन्तये मने सकल-वैष्णव
 
 
अनुवाद
अद्वैत पर हुई असाधारण कृपा को देखकर सभी वैष्णव आश्चर्यचकित हो गये।
 
All the Vaishnavas were astonished to see the extraordinary grace bestowed upon Advaita.
तात्पर्य
कृपा वैभव वाक्यांश का अर्थ है "अंतिम करुणा" या "सर्व-समावेशी उदारता।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)