श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.16.9 
পুনঃ পুনঃ নাচিঽ বলে,—“সুখ নাহি পাই
কেহ বা কি লুকাইযা আছে কোন্ ঠাঞি?”
पुनः पुनः नाचिऽ बले,—“सुख नाहि पाइ
केह वा कि लुकाइया आछे कोन् ठाञि?”
 
 
अनुवाद
नाचते हुए वे बार-बार कह रहे थे, "मुझे कोई खुशी नहीं मिल रही। क्या यहाँ कोई छिपा है?"
 
As he danced, he kept saying, "I can't find any happiness. Is there someone hiding here?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)