श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  2.16.73 
“তুমি সে করিলা চুরি, আমি কি না পারি
হের, দেখ, চোরের উপরে করোঙ্ চুরি”
“तुमि से करिला चुरि, आमि कि ना पारि
हेर, देख, चोरेर उपरे करोङ् चुरि”
 
 
अनुवाद
"तुमने चोरी की है, मैं क्यों नहीं कर सकता? रुको और देखो मैं चोर से कैसे चोरी करता हूँ।"
 
"You have stolen, why can't I? Wait and see how I steal from the thief."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)