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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना
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श्लोक 71
श्लोक
2.16.71
মহাডাকাইতে তুমি, চোরে মহা-চোর
তুমি সে করিলা চুরি প্রেম-সুখ মোর”
महाडाकाइते तुमि, चोरे महा-चोर
तुमि से करिला चुरि प्रेम-सुख मोर”
अनुवाद
"तुम एक महान डाकू हो और सभी चोरों में सबसे बड़े हो। तुमने मेरा परम प्रेम चुरा लिया है।"
"You are a great robber and the greatest of all thieves. You have stolen my ultimate love."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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