श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  2.16.70 
তথাপিহ তুমি চুরি কর ক্ষুদ্র-স্থানে
ক্ষুদ্র সṁহারিতে কৃপা নাহি বাস মনে
तथापिह तुमि चुरि कर क्षुद्र-स्थाने
क्षुद्र सꣳहारिते कृपा नाहि वास मने
 
 
अनुवाद
"फिर भी तुम एक तुच्छ स्रोत से चोरी करते हो। जब किसी तुच्छ प्राणी को नष्ट करने की बात आती है, तो तुम्हें ज़रा भी दया नहीं आती।
 
"Yet you steal from a lowly source. When it comes to destroying a lowly creature, you have no mercy at all.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)