श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.16.7 
নাচিতে নাচিতে প্রভু বলে ঘনে ঘন
“উল্লাস আমার আজি নহে কি কারণ?”
नाचिते नाचिते प्रभु बले घने घन
“उल्लास आमार आजि नहे कि कारण?”
 
 
अनुवाद
नाचते हुए भगवान बार-बार पूछ रहे थे, “आज मैं खुश क्यों नहीं हूँ?”
 
While dancing, God was repeatedly asking, “Why am I not happy today?”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)