श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  2.16.60 
মুঞি চুরি করিযাছোঙ্ মোরে ক্ষমঽ দোষ
আর না করিব যদি তোর অসন্তোষ”
मुञि चुरि करियाछोङ् मोरे क्षमऽ दोष
आर ना करिब यदि तोर असन्तोष”
 
 
अनुवाद
"मैंने चोरी की है। कृपया मुझे माफ़ कर दीजिए। अगर आपको बुरा लगे तो मैं दोबारा ऐसा नहीं करूँगा।"
 
"I stole. Please forgive me. If you mind, I won't do it again."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)