श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  2.16.58 
বলিলে অদ্বৈত-ভয, না বলিলে মরি
বুঝিযা অদ্বৈত বলে যোড-হস্ত করিঽ
बलिले अद्वैत-भय, ना बलिले मरि
बुझिया अद्वैत बले योड-हस्त करिऽ
 
 
अनुवाद
अगर वे बोलेंगे, तो उन्हें अद्वैत का सामना करना पड़ेगा, और अगर नहीं बोलेंगे, तो उनका अंत हो जाएगा। यह समझकर अद्वैत ने हाथ जोड़कर उत्तर दिया।
 
If they spoke, they would have to face Advaita, and if they did not, they would be doomed. Understanding this, Advaita replied with folded hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)