श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.16.56 
কেহ বা কি লৈযাছে মোর পদ-ধূলি
সবে সত্য কহ, চিন্তা নাহি, আমি বলি”
केह वा कि लैयाछे मोर पद-धूलि
सबे सत्य कह, चिन्ता नाहि, आमि बलि”
 
 
अनुवाद
"क्या किसी ने मेरे पैरों की धूल चुरा ली है? चिंता मत करो, मुझे सच-सच बताओ।"
 
"Has someone stolen the dust from my feet? Don't worry, tell me the truth."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)