श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  2.16.53 
অশেষ কৌতুক জানে প্রভু গৌর রায
নাচিতে নাচিতে প্রভু সুখ নাহি পায
अशेष कौतुक जाने प्रभु गौर राय
नाचिते नाचिते प्रभु सुख नाहि पाय
 
 
अनुवाद
भगवान गौरांग असीम शरारतें जानते हैं। जब वे नाचते रहे तो उन्हें कोई खुशी नहीं हुई।
 
Lord Gauranga knows infinite mischief. He felt no joy as he danced.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)