श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  2.16.52 
হৈল প্রভুর মূর্চ্ছা
অদ্বৈত দেখিযা লেপিল চরণ-ধূলা অঙ্গে লুকাইযা
हैल प्रभुर मूर्च्छा
अद्वैत देखिया लेपिल चरण-धूला अङ्गे लुकाइया
 
 
अनुवाद
जब अद्वैत ने देखा कि भगवान बेहोश हो गए हैं, तो उसने चुपके से भगवान के चरणों की धूल ली और उसे अपने शरीर पर मल लिया।
 
When Advaita saw that the Lord had fainted, he secretly took the dust from the Lord's feet and rubbed it on his body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)