श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.16.51 
এক-দিন মহাপ্রভু বিশ্বম্ভর নাচে
আনন্দে অদ্বৈত তান বুলে পাছে পাছে
एक-दिन महाप्रभु विश्वम्भर नाचे
आनन्दे अद्वैत तान बुले पाछे पाछे
 
 
अनुवाद
एक दिन जब भगवान विश्वम्भर आनंद में नृत्य कर रहे थे, तो अद्वैत उनके पीछे नृत्य कर रहा था।
 
One day when Lord Vishvambhara was dancing in bliss, Advaita was dancing behind him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)