श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  2.16.50 
অদ্বৈত-সিṁহের এই একান্ত মহিমাএ
রহস্য নাহি জানে যত দুষ্ট জনা
अद्वैत-सिꣳहेर एइ एकान्त महिमाए
रहस्य नाहि जाने यत दुष्ट जना
 
 
अनुवाद
सिंह-सदृश अद्वैत की ऐसी ही असाधारण महिमा है। किन्तु दुष्ट लोग इस गुप्त सत्य को नहीं जानते।
 
Such is the extraordinary glory of lion-like Advaita. But the wicked do not know this secret truth.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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